नैनी: पहले ही दिन मारुति सुजुकी का हाई-टेक ड्राइविंग ट्रैक धड़ाम, दूर-दराज से आए आवेदक हुए बेहाल
प्रयागराज/नैनी (मोहम्मद नईम संवाददाता)
ड्राइविंग लाइसेंस प्रक्रिया को पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के दावे पहले ही दिन हवा-हवाई साबित हुए। नैनी स्थित ड्राइविंग ट्रेनिंग एवं टेस्टिंग इंस्टीट्यूट (DTTI) प्रयागराज में मारुति सुजुकी द्वारा तैयार किए गए अत्याधुनिक ऑटोमैटिक टेस्टिंग ट्रैक का उद्घाटन तो बड़ी उम्मीदों के साथ हुआ, लेकिन क्रियान्वयन के मोर्चे पर सिस्टम पहले ही टेस्ट के बाद ध्वस्त हो गया।
ऑनलाइन सप्लाई ठप, घंटों परेशान रहे आवेदक
जानकारी के अनुसार, जैसे ही पहले आवेदक का ऑटोमैटिक टेस्ट संपन्न हुआ, उसके तुरंत बाद पूरे ट्रैक की ऑनलाइन बिजली और सर्वर सप्लाई अचानक ठप हो गई। सिस्टम बंद होते ही टेस्ट प्रक्रिया पूरी तरह ठप पड़ गई। प्रयागराज के सुदूर ग्रामीण इलाकों से सुबह-सुबह उम्मीद लेकर पहुंचे सैकड़ों आवेदकों को भीषण गर्मी और अव्यवस्था के बीच घंटों लाइन में खड़े रहने पर मजबूर होना पड़ा।
जिम्मेदार अधिकारी बने रहे बेखबर
चौंकाने वाली बात यह रही कि इतनी बड़ी तकनीकी नाकामी के बावजूद मौके पर मौजूद संबंधित प्रशासनिक अधिकारी पूरी तरह बेखबर और मूकदर्शक बने रहे। आवेदकों की शिकायतों का समाधान करने या उन्हें सही जानकारी देने वाला कोई जिम्मेदार व्यक्ति वहां मौजूद नहीं था। दूर-दराज से अपनी दिहाड़ी और समय छोड़कर आए लोगों में अव्यवस्था को लेकर भारी आक्रोश देखने को मिला।
मारुति प्रोजेक्ट हेड का मीडिया से दूरी बनाना खड़े कर रहा सवाल
जब इस पूरे मामले पर मारुति सुजुकी के प्रोजेक्ट हेड ऑफिसर आलोक मलिक से उनका पक्ष जानने और तकनीकी खराबी का कारण पूछने की कोशिश की गई, तो उन्होंने मीडिया से बात करने और बाइट देने से साफ इंकार कर दिया। प्रोजेक्ट हेड का इस तरह मीडिया के सवालों से भागना कई गंभीर सवाल खड़े करता है:
* आखिर पहले ही दिन सिस्टम फेल होने के पीछे क्या वजह थी?
* क्या ट्रैक में लगाए गए उपकरणों (हार्डवेयर व सेंसर) और ऑनलाइन सप्लाई सिस्टम की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं है?
* क्या जल्दबाजी में बिना बैकअप और ट्रायल के ही इतने बड़े हाई-टेक प्रोजेक्ट को चालू कर दिया गया?
तकनीक की गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल
लाखों-करोड़ों की लागत से बने इस ऑटोमैटिक टेस्टिंग ट्रैक की पहली ही परीक्षा में फेल होने से इसके निर्माण और इसमें इस्तेमाल हुए प्रोडक्ट्स की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लग गए हैं। लोगों का कहना है कि जब शुरुआत ही इतनी बदहाल है, तो आने वाले दिनों में यह सिस्टम आवेदकों के लिए कितनी राहत और कितनी मुसीबत लाएगा, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
पीड़ित आवेदकों ने उच्च अधिकारियों से इस तकनीकी विफलता की जांच कराने और भविष्य में बैकअप व्यवस्था दुरुस्त रखने की मांग की है, ताकि आम जनता को बिना वजह प्रताड़ित न होना पड़े।




