मोहम्मद हंजला फारूकी के नेतृत्व में इलाहाबाद जनकल्याण समिति ने ए डीएम सिटी के माध्यम से प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन

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 महिला पत्रकार शाहीन प्रकरण में निष्पक्ष जांच की मांग

मोहम्मद हन्जला फारूकी के नेतृत्व में इलाहाबाद जन कल्याण समिति ने प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन

प्रयागराज। दिल्ली में 4PM की महिला पत्रकार शाहीन द्वारा अपने साथ कथित मारपीट, पुलिस द्वारा थाने ले जाने तथा ड्यूटी के दौरान कथित दुर्व्यवहार के आरोपों को लेकर मोहम्मद हन्जला फारूकी के नेतृत्व में इलाहाबाद जन कल्याण समिति ने गंभीर चिंता व्यक्त की है।

समिति की ओर से प्रधानमंत्री, भारत सरकार को अपर जिलाधिकारी (नगर), प्रयागराज के माध्यम से संवैधानिक एवं कानूनी ज्ञापन भेजकर मामले की निष्पक्ष, स्वतंत्र एवं पारदर्शी जांच कराने की मांग की गई है।

हन्जला फारूकी ने कहा कि किसी भी आरोप की अंतिम सत्यता सक्षम जांच के बाद ही निर्धारित होनी चाहिए और जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता। लेकिन यदि जांच में किसी पत्रकार के साथ कानून के विपरीत बल प्रयोग, धमकी, उत्पीड़न अथवा दुर्व्यवहार प्रमाणित होता है, तो संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि पत्रकारों को जनहित के मुद्दों पर सवाल पूछने, तथ्य एकत्र करने और जनता तक सूचनाएं पहुंचाने का अधिकार है। संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(a) और 21 में निहित अधिकारों की प्रभावी रक्षा लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए आवश्यक है।

राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग

समिति ने केंद्र सरकार से पत्रकारों की सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा एवं प्रेस स्वतंत्रता कानून (Journalist Protection Act) बनाने की मांग की है। साथ ही पत्रकारों की शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए स्वतंत्र शिकायत-निवारण एवं निगरानी तंत्र स्थापित करने की मांग भी की गई।

ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि यदि किसी पत्रकार के साथ नाम, धर्म या पहचान के आधार पर भेदभाव किए जाने का आरोप सामने आता है, तो उस पहलू की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

जरूरत पड़ी तो शांतिपूर्ण आंदोलन

हन्जला फारूकी ने स्पष्ट किया कि इलाहाबाद जन कल्याण समिति संविधान और कानून के दायरे में रहकर पत्रकारों की सुरक्षा एवं प्रेस की स्वतंत्रता के लिए लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण संघर्ष जारी रखेगी।

उन्होंने कहा कि यदि मामले में निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई नहीं होती है, तो समिति पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं नागरिकों के साथ मिलकर कानून के दायरे में शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन करेगी।




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