कागज़ पर ऑल ओके ज़मीन पर 'ज़ीरो प्रयागराज नैनी डीटीआई सेंटर की पीली पट्टी का सच
जहाँ ट्रैक पर ना तो पीली पट्टियाँ साफ़ दिख रही हैं और ना ही जमीन पर दिशा बताने वाले पीला पट्टी वाले एरो बने हैं
यहां मोटरसाइकिल का टेस्ट ट्रैक नियम के मुताबिक आवेदक को ज़मीन पर बनी पीली पट्टियों का एरो के निशानों को देखकर बाइक से आठ के आकार में या निर्धारित ट्रैक पर घुमानी होती है लेकिन ज़रा नज़र डालिए पट्टियाँ गायब हैं जमीन पर पीला एरो का कोई नामोनिशान नहीं है अब सवाल यह है कि बिना गाइडलाइन के आवेदक बाइक कहाँ मोड़े और कहाँ चलाए
आवेदक को पता ही नहीं चल रहा कि बाइक कहाँ से मोड़नी है और कहाँ ले जानी है जरा सा भी ट्रैक से आवेदक बाहर जाता है तो कैमरा रिजेक्ट कर देता है और वहां उपस्थित कर्मचारी
बोलते हैं कि फेल हो गए इस पर आवेदक ने कहा पीले पट्टी ऐरो मिटा हुआ है तो जानकारी कैसे मिले कर्मचारी का कहना है कि यह मेरा काम नहीं है हमारा काम टेस्ट कंडक्ट कराना है मेंटेनेंस का काम ऊपर के सीनियर ऑफिसर्स ठेकेदार का होता है मेरा काम नहीं है
देखने और सोचने वाली बात है कि
आवेदक फीस भर रहे हैं चक्कर काट रहे हैं उनकी गलती न होने के बावजूद वो फेल हो रहे हैं इस नुकसान का ज़िम्मेदार कौन है
सच्चाई यही है कि सेंटर का रखरखाव मेनटेनेंस मानक अनुसार पूरे नहीं तरीके से दिखाई नहीं दे रहे हैं केवल कागज़ों में फ़ाइलें दौड़ रही हैं टेंडर और मेंटेनेंस के नाम पर बजट बन रहे हैं लेकिन ज़मीनी स्तर पर सब कुछ खोखला है प्रयागराज नैनी का यह डीटीआई सेंटर इस बात का जीता जागता सबूत है कि कैसे डी टी आई सेंटर के प्रशासनिक की लापरवाही का खामियाज़ा आम जनता को अपनी जेब और समय गंवाकर चुकाना पड़ता है
बिना पीली पट्टी वाली एरो के टेस्ट लेना आवेदकों के साथ सरासर अन्याय है अब देखना यह होगा कि इस खबर के बाद डी टी आई सेंटर के कर्मचारी एवं टेंडर ठीकेदारों की नींद खुलती है या फिर यह कागजी खेल यूं ही चलता रहेगा आप देख रहे हैं पी एम एन टोन्टी फोर न्यूज़ चैनल प्रयागराज से मोहम्मद नईम की रिपोर्ट




